Monday, 5 December 2016

त्रिकुटा/त्रिकटु चूर्ण ठण्ड के मौसम में होने वाले इन 18 रोगों के लिए अचूक रामबाण औषिधि है, जरूर अपनाएँ और शेयर करे


➡ त्रिकटु/त्रिकुटा चूर्ण :
पीपल, मिर्च और सोंठ के चूर्ण को त्रिकुटा/त्रिकटु कहते है। त्रिकटु या त्रिकुटा के तीनो ही घटक आम पाचक हैं अर्थात यह आम दोष का पाचन कर शरीर में इसकी विषैली मात्रा को कम करते हैं। आमदोष, पाचन की कमजोरी के कारण शरीर में बिना पचे खाने की सडन से बनने वाले विशले तत्व है। आम दोष अनेकों रोगों का कारण है। इसे धारण दवा मत समझियेगा, यह बड़े काम का चूर्ण है। विशेषकर सर्दी में यह आपको चमत्कारी परिणाम देगा इसलिए एक बार जरूर आजमाएँ और ऊर्जा से ओत प्रोत निरोगी हो जाएँ।

➡ इसे बनाने का तरीका :
 सोन्ठ अथवा सुन्ठी अथवा सूखी हुयी अदरख, काली मिर्च, छोटी पीपल। इस तीनों को बराबर बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर अथवा मिक्सी में डालकर महीन चूर्ण बना लें| ऐसा बना हुआ चूर्ण "त्रिकटु चूर्ण" या त्रिकुटा के नाम से जाना जाता है।
यह चूर्ण अपच, गैस बनना, पेट की आंव, कोलायटिस, बवासीर, खान्सी, कफ का बनना, सायनोसाइटिस, दमा, प्रमेह तथा बहुत सी बीमारियों में लाभ पहुंचाता है। शुण्ठी पाचन और श्वास अंगों पर विशेष प्रभाव दिखाता है। इसमें दर्द निवारक गुण हैं। यह स्वाद में कटु और विपाक में मधुर है। यह स्वभाव से गर्म है।
पिप्पली, उत्तेजक, वातहर, विरेचक है तथा खांसी, स्वर बैठना, दमा, अपच, में पक्षाघात आदि में उपयोगी है। यह तासीर में गर्म है। पिप्पली पाउडर शहद के साथ खांसी, अस्थमा, स्वर बैठना, हिचकी और अनिद्रा के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक टॉनिक है।
मरिच या मरिचा, काली मिर्च को कहते हैं। इसके अन्य नाम ब्लैक पेपर, गोल मिर्च आदि हैं। यह एक पौधे से प्राप्त बिना पके फल हैं। यह स्वाद में कटु, गुण में गर्म और कटु विपाक है। इसका मुख्य प्रभाव पाचक, श्वशन और परिसंचरण अंगों पर होता है। यह वातहर, ज्वरनाशक, कृमिहर, और एंटी-पिरियोडिक हैं। यह बुखार आने के क्रम को रोकता है। इसलिए इसे निश्चित अंतराल पर आने वाले बुखार के लिए प्रयोग किया जाता है।
अदरक का सूखा रूप सोंठ या शुंठी कहलाता है। एंटी-एलर्जी, वमनरोधी, सूजन दूर करने के, एंटीऑक्सिडेंट, एन्टीप्लेटलेट, ज्वरनाशक, एंटीसेप्टिक, कासरोधक, हृदय, पाचन, और ब्लड शुगर को कम करने गुण हैं। यह खुशबूदार, उत्तेजक, भूख बढ़ाने वाला और टॉनिक है। सोंठ का प्रयोग उलटी, मिचली को दूर करता है।


➡ त्रिकटु/त्रिकुटा चूर्ण के 18 अद्भुत फायदे :
इसे सेन्धा नमक के साथ मिलाकर खाने से वमन, जी मिचलाना , भूख का न लगना आदि मे लाभकारी है।
अर्जुन की छाल के साथ बनाया गया इसका काढा हृदय रोगों में लाभ पहुंचाता है।
खांसी, कफ, वायु, शूल नाशक, व अग्निदीपक। मात्रा 1/2 से 1 ग्राम प्रातः-सायंकाल शहद से।
त्रिकटु १/२ चमच्च नित्य गुनगुने पानी से प्रयोग जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
त्रिकटु , हल्दी , त्रिफला , वायविडंग , और मंडूर को बराबर की मात्रा में मिलाकर , इसे घी और शहद के साथ लेने से पीलिया ठीक होता है
सायनस में अगर कफ जम जाता हो तो त्रिकटु और रीठा पानी में मिला कर नाक में डालने से सारा जमा हुआ कफ बाहर निकल आता है.
त्रिकुटा करंज और सेंधा नमक घी और शहद के साथ बच्चों को देने से सुखा रोग में लाभ होता है.
त्रिकुटा, जवाक्षार, और सेंधा नमक छाछ के साथ लेने से जलोदर ठीक होता है।
टॉन्सिल्स में सुजन के लिए त्रिकुटा और अविपत्तिकर चूर्ण को सामान मात्रा में ले कर , इसका एक चम्मच गुनगुने पानी से ले।
त्रिकुटा, त्रिफला तथा मुस्तक जड़, कटुकी प्रकन्द, निम्ब छाल, पटोल पत्र, वासा पुष्प व किरात तिक्त के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) और गुडूची को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की बराबर मात्रा लेकर काढ़ा बना लें। इसे दिन में 3 बार लेने से आभिन्यास बुखार ठीक हो जाता है।
त्रिकुटा (सोंठ, मिर्च और पीपल), त्रिफला (हरड़, बहेड़ा और आंवला), पटोल के पत्तें, नीम की छाल, कुटकी, चिरायता, इन्द्रजौ, पाढ़ल और गिलोय आदि को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसका सेवन सुबह तथा शाम में करने से सन्निपात बुखार ठीक हो जाता है।
त्रिकुटा के बारीक चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से खांसीठीक हो जाती है।
कब्ज में त्रिकुटा (सोंठ, काली मिर्च और छोटी पीपल) 30 ग्राम, त्रिफला (हरड़, बहेड़ा और आंवला) 30 ग्राम, पांचों प्रकार के नमक 50 ग्राम, अनारदाना 10 ग्राम तथा बड़ी हरड़ 10 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 6 ग्राम रात को ठंडे पानी के साथ लेने से कब्जकी शिकायत दूर हो जाती है।
त्रिकुट, त्रिफला, सुहागे की खील, शुद्ध गन्धक, मुलहठी, करंज के बीज, हल्दी और शुद्ध जमालगोटा को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पिसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद भांगरेके रस में मिलाकर 3 दिनों तक रख दें। इसे बीच-बीच में घोटते रहे। फिर इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें और इसे छाया में सुखा लें। इसमें से 1-1 गोली खाना-खाने के बाद सेवन करने से यकृत के रोग में लाभ मिलता है।
त्रिकुटा, जवाखार और सेंधानमक को छाछ (मट्ठा) में मिलाकर पीने से जलोदर रोग ठीक हो जाता है।
त्रिकुटा, चीता, अजवायन, हाऊबेर, सेंधानमक और कालीमिर्च को पीसकर चूर्ण मिला लें। इसे छाछ (मट्ठे) के साथ सेवन करने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है।
त्रिकुटा, चिरायता, बांसा, नीम की छाल, गिलोय और कुटकी को 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर सेवन करें। इससे पीलिया कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
त्रिकुटा, बड़ी करंज, सेंधानमक, पाढ़ और पहाड़ी करंज को पीसकर इसमें शहद और घी मिलाकर बच्चों को सेवन कराने से `सूखा रोग´ (रिकेट्स) ठीक हो जाता है।

➡ त्रिकटु चूर्ण के सेवन में सावधानियाँ :
यह पित्त को बढ़ाता है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोग इसका सेवन सावधानी से करें।
अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
जिन्हें पेट में सूजन हो gastritis, वे इसका सेवन न करें।
शरीर में यदि पहले से पित्त बढ़ा है, रक्त बहने का विकार है Bleeding disorder, हाथ-पैर में जलन है, अल्सर है, छाले हैं तो भी इसका सेवन न करें।
आयुर्वेद में उष्ण चीजों का सेवन गर्भावस्था में निषेध है। त्रिकटु का सेवन गर्भावस्था में न

Tuesday, 29 November 2016

ठण्ड के दिनों में कैसर का सेवन किसी संजीवनी से कम नही, इसके ये 17 चमत्कारी फायदे रोगों के लिए है

➡ कैसर (Saffron)

केसर एक सुगंध देने वाला पौधा। पतली बाली सरीखा केसर 15-25 सेंटीमीटर ऊंचा होता है। इसके पुष्प को हिन्दी में केसर, उर्दू में जाफरान और अंग्रेजी में सैफरॉन कहते हैं। चिकित्सा में यह उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक मानी गयी है।
केसर स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। केसर की खुशबू बहुत तेज होती है। केसर को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में डालकर खाया जाता है। भारत में केसर कश्मीर में पैदा होता है। गर्म पानी में डालने पर केसर से गहरा पीला रंग बनाया जाता है। पेट संबंधित परेशानियों के इलाज के लिए केसर बहुत फायदेमंद है। चोट लगने या झुलसने पर भी केसर का लेप लगाने से फायदा होता है। आइए हम आपको केसर के गुणों की जानकारी देते हैं।


➡ कैसर के 17 चमत्कारी फायदे :

1. पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद है। बदहजमी, पेट-दर्द व पेट में मरोड़ आदि हाजमे से संबंधित शिकायतों में केसर का सेवन करने से फायदा होता है।
2. महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए 2-2 रत्ती केसर दूध में घोलकर दिन में तीन बार देना फायदेमंद होता है। 
3.बच्चों को सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर केसर की एक पंखु़डी पानी में घोंटकर इसका लेप छाती, पीठ और गले पर लगाने से आराम होता है। 
4. चंदन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंख और मस्तिष्क को शीतलता, शांति और ऊर्जा मिलती है।
5. चन्दन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंखों और दिमाग को शीतलता मिलती है। इस लेप को लगाने से दिमाग तेज होता है।
6. सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।
7. नाक से खून बहने की समस्या के उपचार के लिए भी केसर बहुत फायदेमंद है। नकसीर होने पर चंदन के साथ केसर को मिलाकर लेप लगाइए, नाक से खून बहना बंद हो जाएगा।
इससे नाक से रक्त का गिरना बंद हो जाता है और सिर दर्द जल्द दूर होता है। 
8. बच्चे को सर्दी हो तो केसर की 1-2 पंखु़डी 2-4 बूंद दूध के साथ अच्छी तरह घोंटें ताकि केसर दूध में घुल जाए। इसे एक चम्मच दूध में मिलाकर बच्चे को सुबह-शाम पिलाएं। इससे उसे काफी लाभ होगा। माथे, नाक, छाती व पीठ पर लगाने के लिए केसर, जायफल व लौंग का लेप पानी में बनाएं और रात को सोते समय इसका लेप करें।
9. बच्चें को अगर सर्दी और जुकाम की समस्या हो तो केसर का दूध सुबह-शाम पिलाने से बच्चे की सर्दी और जुकाम में राहत मिलेगी।
10. बच्चें की सर्दी अगर समाप्त न हो रही हो तो बच्चे की नाक, माथे, छाती और पीठ पर केसर, जायफल और लौंग का लेप लगाने से फायदा होता है। 
11. शिशुओं को अगर सर्दी जकड़ ले और नाक बंद हो जाये तो मां के दूध में केसर मिलाकर उसके माथे और नाक पर मला जाये तो सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है।आधा ग्राम केसर को घी में पीसकर खाने से 1 साल पुरानी कब्ज़ दूर होती है।120 मिलीग्राम केसर को 50 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रात को भिगो दें। सुबह 20-25 किशमिश खाकर इस पानी को पीएं। इसका सेवन 15 दिनों तक करने से हृदय की कमजोरी दूर होती है।
12. अतिसार में भी केसर बहुत फायदेमंद है। अतिसार होने पर केसर को जायफल, आम की गुठली, सोंठ को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर इसका लेप लगाने से फायदा होता है।
महिलाओं के लिए केसर बहुत फायदेमंद होता है। महिलाओं की कई शिकायतें जैसे - मासिक चक्र में अनियमिता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है। 
13. गंजे लोगों के लिये तो यह संजीवनी बूटी की तरह कारगर है। जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, उन्हें थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीस लेना चाहिए। तत्पश्चात् उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है। रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हो तो भी ये उपाय बेहद कारगर है।
यह एक कामशक्ति बढ़ाने वाला रसायन है। अत: इसका उपयोग बाजीकरण के लिए भी किया जाता है। केसर, वच और पीपलामूल 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लेने से हिस्टीरिया रोग ठीक होता है।  हिस्टीरिया जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में केसर का सेवन फायदेमंद होता है।
14. त्वचा के झुलसने या चोट लगने पर केसर के लेप लगाना चाहिए। इससे तुरंत फायदा होता है और नई त्वचा का निर्माण जल्द होता है। 
15. त्वचा का रंग उज्ज्वल करने वाली, रक्तशोधक, धातु पौष्टिक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली, कफ नाशक, मन को प्रसन्न करने वाली रंगीन और सुगन्धित करने वाली होती है।
16. अगर सर्दी लग गई हो तो रात्रि में एक गिलास दूध में एक चुटकी केसर और एक चम्मच शहद डालकर यदि मरीज को पिलाया जाए तो उसे अच्छी नींद आती है।
17. केसर को दूध के साथ पीने से शारीरिक शक्ति बढती है। केसर दूध पौरूष व कांतिवर्धक होता है। ज़ाडे में गर्म व गर्मी में ठंडे दूध के साथ केसर का उपयोग स्वास्थ्यवर्धक होता है।
18. गर्भावस्था के दौरान केसर का सेवन करने से होने वाला बच्चा तंदुरूस्त होता है और कई तरह की बीमारियों से बचा रहता है।
19. आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार नियमित रूप से, अल्प मात्रा में ग्रहण करने पर यह त्रि-दोषों (वात, पित्त व कफ) से निजात दिलाता है।इसका स्वभाव गर्म होता है। अत: औषधि के रूप में 250 मिलिग्राम व खाद्य के रूप में 100 मिलिग्राम से अधिक मात्रा में इसके सेवन की सलाह नहीं दी जाती।
20. यह उत्तेजक, वाजीकारक, यौनशक्ति वर्धक, त्रिदोष नाशक, वातशूल शमन करने वाली है। इतना ही नहीं, यह मासिक धर्म ठीक करने वाली, त्वचा को निखारने वाली, रक्तशोधक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली भी है। कफ का नाश करने, मन को प्रसन्न रखने, मस्तिष्क को बल देने वाली, हृदय और रक्त के लिए हितकारी भी है।

Thursday, 1 September 2016

आम की पत्तियाँ इन 10 गंभीर रोगों की औषिधि है, जाने इसके बारे में और शेयर करेगर्मियों में सबसे ज्यादा मिलने वाला और खाया जाने वाला फल आम, स्वाद में बेहद स्वादिष्ट होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम की पत्तियां भी कोई कम गुणकारी नहीं होतीं। आम की पत्तियों में थेराप्यूटिक और अन्य मेडिकल प्रॉपर्टी होती हैं। इसके अलावा इसमें अच्छी खासी मात्रा में विटामिन सी, बी और ए भी पाया जाता है। जब आप की पत्तियां ताजी, छोटी और लाल तथा बैंगनी रंग लिये हुए होती हैं, तभी उन्हें तोड़ कर प्रयोग किया जा सकता है। बड़ी और पुरानी होने पर यह अपना असर नहीं दिखा पाती। आम की पत्तियां एक ऐसा खज़ाना हैं, जो आपको फ्री में ही मिल जाएगा इसलिये इसे अच्छी ढंग से प्रयोग करें। आम की पत्तियां साल भर मौजूद रहती हैं इसलिये आपको बीमारी दूर करने के लिये किसी खास मौसम का इंतजार करने की जरुरत नहीं है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टी होने के नाते यह लगभग हर बीमारी का खात्मा कर सकती है।


गर्मियों में सबसे ज्यादा मिलने वाला और खाया जाने वाला फल आम, स्वाद में बेहद स्वादिष्ट होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम की पत्तियां भी कोई कम गुणकारी नहीं होतीं।
आम की पत्तियों में थेराप्यूटिक और अन्य मेडिकल प्रॉपर्टी होती हैं। इसके अलावा इसमें अच्छी खासी मात्रा में विटामिन सी, बी और ए भी पाया जाता है।
जब आप की पत्तियां ताजी, छोटी और लाल तथा बैंगनी रंग लिये हुए होती हैं, तभी उन्हें तोड़ कर प्रयोग किया जा सकता है। बड़ी और पुरानी होने पर यह अपना असर नहीं दिखा पाती।
आम की पत्तियां एक ऐसा खज़ाना हैं, जो आपको फ्री में ही मिल जाएगा इसलिये इसे अच्छी ढंग से प्रयोग करें। आम की पत्तियां साल भर मौजूद रहती हैं इसलिये आपको बीमारी दूर करने के लिये किसी खास मौसम का इंतजार करने की जरुरत नहीं है।
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टी होने के नाते यह लगभग हर बीमारी का खात्मा कर सकती है।

1. मधुमेह से बचाए : 

आम की नाजुक और ताजा पत्तियों की मदद से आप मधुमेह को भी कंट्रोल कर सकते हैं। यह ब्लड शुगर को कंट्रोल कर के आपके हेल्थ को ठीक रखती है। इसमें मौजूद हाइपोग्लाइसेमिक प्रभाव से ब्लड शुगर लो हो जाता है।

2. दमा से बचाए : 

यह सांस की बीमारी को भी कंट्रोल करती है। यह चाइनीज़ मेडिसिन में काफी ज्यादा प्रयोग की जाती हैं। आप आम की पत्तियों को पानी में उबाल कर बनाया गया काढा पियें। इसमें थोड़ी सी शहद भी मिक्स कर सकते हैं।

3. ब्लड़ प्रेशर लो करने में मददगार :

इसमें हाइपोटेंसिव प्रॉपर्टी होती है जिसके चलते यह ब्लड प्रेशर को लो करने में सहायक होती है। यह खून की नाडियों को मजबूती देती है और खून के थक्कों को जमने से रोकती भी है।

4. गॉल ब्लैडर और किडनी स्टोन से बचाए : 

रोजाना आम की पत्तियों के पावडर से बना घोल पीने से किडनी के स्टोन दूर करने में मदद मिलती है। आम की पत्तियों को छाया में सुखा कर पावडर बनाना चाहिये।

5. पेचिश का इलाज : 

यह खून आने वाली पेचिश का भी इलाज करती है। आम की पत्तियों को सुखा कर पावडर बनाएं और फिर इसे दिन में दो बार पानी के साथ खाएं। इससे आराम मिलेगा।

6. कानों का दर्द दूर भगाए : 

आम की पत्तियों का जूस निकाल कर कानों में डालिये, इससे दर्द बंद हो जाएगा। जूस को प्रयोग करने से पहले हल्का गरम करना ना भूलें।

7. हिचकी और गले की समस्या से राहत : 

 अगर आपको हिचकी आ रही है या गले में कोई परेशानी है तो थोड़ी सी मुलायम आम की पत्तियों को जला लें और फिर उसका धुंआ सांस के दृारा अंदर खींचे।

8. पेट के लिये रामबाण : 

थोड़ी सी आम की पत्तियों को गरम पानी में डालें, बर्तन को ढंक दें और रातभर के लिये इसे ऐसे ही छोड़ दें। दूसरे दिन पानी को छान कर खाली पेट पी जाएं। इसे नियमित पीने से पेट की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है और पेट का कोई रोग नहीं होता ।

👉आम की पत्तियों का कैसे करें प्रयोग : 

 आप चाहें तो छोटी, नाजुक पत्तियों को तोड़ कर मुंह में डाल कर चबा भी सकते हैं। अगर इसका पेय बनाना हो तो पत्तियों को तोड़ कर हल्के गुनगुने पानी में डाल कर बर्तन को ढंक दें और सुबह पानी छान कर पी जाएं। अगर इसका पावडर बनाना हो, तो नाजुक पत्तियों को तोड़ कर धो कर छाया में सुखा लें और फिर सूखने के बाद इसका पावडर बना कर सेवन करें।

गुलाब जल के 12 बेहतरीन फायदे जान दंग रह जाएंगे आप, जरूर पढ़ेगुलाब का नाम सुनते ही हमें हमारे आसपास एक सुगंधित वातावरण का एहसास होने लगता है। गुलाब जल ताजे ताजे गुलाब फूलों की पत्तियों (पंखुङियों) से निकाला हुआ प्राकृतिक रस है। गुलाब जल हमारे शरीर को अत्यंत शीतलता प्रदान करने वाला एक प्राकृतिक उपाय है।

गुलाब का नाम सुनते ही हमें हमारे आसपास एक सुगंधित वातावरण का एहसास होने लगता है। गुलाब जल ताजे ताजे गुलाब फूलों की पत्तियों (पंखुङियों) से निकाला हुआ प्राकृतिक रस है। गुलाब जल हमारे शरीर को अत्यंत शीतलता प्रदान करने वाला एक प्राकृतिक उपाय है।

यूँ तो बाजार में गुलाब जल बङी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। परंतु यह गुलाब जल आप प्राकृतिक तरीके से बङी आसानी से अपने घर पर भी बना सकते हैं। 8 से 10 ताजे गुलाब की पंखुङियों को करीबन 15 से 20 मिनट तक पानी में उबालें। उसके बाद उसे यूँ ही 5 से 6 घंटे तक रहने दें। ठंङा होने पर छान लें। आप इस गुलाब जल को बोतल में भरकर फ्रिज में भी रख सकते हैं। तथा इसे लंबे समय तक इस्तेमाल भी कर सकते हैं।


➡ गुलाब जल के बहुत सारे स्वास्थ्यवर्धक गुण हैं। आइये हम उन गुणों की ओर एक नजर डालें :

1. झुर्रियाँ करता है कम – 


यह एक प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन है। इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर त्वचा-संबंधित सारी समस्याएँ दूर हो जाती हैं। चेहरे पर आई हुई झुर्रियाँ भी कम होने लगती हैं। गुलाबजल की सहायता से हम एक बहुत ही बेहतरीन फेस पैक बना सकते हैं।
2 चम्मच नींबू का रस
4 चम्मच चंदन पावङर या मुलतानी मिट्टी
2 से 3 चम्मच गुलाबजल
इन चीजों को मिक्स करके अपने चेहरे पर लगाएं। तथा 15 मिनट बाद चेहरा साफ पानी से धोलें। चेहरे का रंग निखरने लगता है तथा चेहरा तरो-ताजा लगने लगता है।

2. स्किन टैन होने से बचाता है – 

गुलाबजल को इस्तेमाल में लाने से सनबर्न (स्किन टैनिंग) की समस्या भी दूर होने लगती है। यदि आप तेज धूप में बाहर जाने से पहले अपने शरीर पर थोङा सा गुलाबजल लगाते हैं तो ठंङक का एहसास होने लगता है तथा तेज धूप का आपके शरीर पर असर नहीं होता।

3. तेज धूप के कारण होने वाले सिरदर्द से राहत दिलाता है – 

यदि आप को तेज धूप में बाहर जाने-आने से सिरदर्द होता है तो एकदम ठंङे गुलाब जल में भीगा हुआ कपङा या रूमाल सिर पर 30 मिनट तक रखने से सिरदर्द गायब हो जाता है तथा एक शीतलता से भरी राहत मिलने लगती हैं।

4. आंखो के नीचे काले-धब्बों से दिलाए छुटकारा –

कई बार आंखों (eyes) के नीचे काले दाग धब्बे (dark cricles) हो जाते हैं। यदि हम रूई को गुलाबजल में ङुबोकर 10 मिनट तक अपनी आंखों पर रखें तो यह दाग दूर होने लगते हैं।

5. आंखो की थकान करता है कम –

यदि आपको आँखों में थकान महसूस हो रही है या आंखों में जलन होती है तो गुलाबजल मे भीगे हुई रूई के टुकङों को लगभग 15 मिनट तक आंखों पर रखकर ठंङे पानी से अपनी आंखें धो लीजिए। तुरंत आराम मिलने लगता हैं।

6. अच्छी नींद – 

 यदि आप रात को सोने से पहले गुलाबजल की कुछ बुंदे आखों में ङालें तो आपको आराम मिलता है, तथा नींद भी अच्छी आती है। आंखों की रोशनी बढती है तथा आँखों में चमक आने लगती हैं।

7. कील-मुहांसों से छुटकारा –

इसके नियमित इस्तेमाल से आप चेहरे पर आए हुए मुंहासों से छुटकारा पा सकते हैं। यह हमारी त्वचा से धूल-मिट्टी के कण हटाता है तथा त्वचा का सौंदर्य निखरने में अहम भूमिका निभाता है।

8. एंटी-सेप्टिक – 

हमारे शरीर पर अक्सर घाव होने की वजह से हमें जलन होने लगती हैं। जली हुई त्वचा पर अक्सर ठंङा ठंङा गुलाबजल लगाने से जलन में काफी आराम मिलता हे। गुलाब जल एक प्राकृतिक कीटाणु-नाशक होने की वजह से हमारे घाव जल्दी भरने में आसानी मिलती हैं।

9. मुलायम बालों के लिए –

यदि आप रात को सोने से पहले अपने सिर पर 5 से 6 चम्मच गुलाबजल लेकर मालिश करें तथा सुबह बालों में शैम्पू लगातर धोंले तो बालों में रूसी कम होने लगती हैं। गुलाबजल बालों के लिए एक बहुत ही अच्छा कंङीशनर है, यह बालों को मुलायम बनाकर उनमें चमक लाता हैं।

10. कान-दर्द –

गुलाबजल में कई प्रकार के औषधीय गुण भी पाये जाते हैं। कान में दर्द होने पर थोङी गुलाब जल की बूंदें कान में ङालने से काफी राहत मिलती हैं।

11. दाढ़ का दर्द – 

गुलाब जल में थोङा सा नींबू का रस मिलाकर दाढ पर लगाने से दाढ का दर्द ठीक होने में मदद मिलती हैं।

12. मिठाई में उपयोग –

गुलाबजल का उपयोग कई प्रकार की मिठाइयों को बनाने में भी किया जाता है। अत्यंत खुशबुदार होने के कारण गुलाबजल की थोङी बूँदे यदि मिठाई में ङालें तो उसका स्वाद और भी बढ जाता हैं।

Tuesday, 30 August 2016

काजू (cashew) खाने के 10 बेहतरीन फायदे जान दंग रह जायेंगे आप, जरूर पढ़े


➡ काजू (cashew) खाने के 10 बेहतरीन फायदे :

1. हड्डियों को मजबूत रखता है – काजू में प्रोटीन (protein) बहुत अधिक मात्र में पाई जाती है , जो आप के हड्डियों को मजबूत बनये रखता है।

2. बालो के मजबूती –  काजू में कॉपर (Copper) होता है जो बालो में मजबूत बनता है।

3. मजबूत मसूड़े –  काजू खाने से मंसुड़ो के तकलीफ से दूर होती है और साथ हि साथ चमकदार बनाने में मददगार साबित होता है।

4. खुबसुरत चेहरे के लिए –  काजू को भिगो के इसे पिस कर इसका लेप तयार कर इसे आपने चेहरे पर लगाए , इससे आपके चेहरे पर निखर बरकरार रहेगी। इसके regular इस्तेमाल से त्वचा में रौनक आयेगी।

5. कैंसर के लिए कारगर – काजू में पाये जाने वाले ingredients और chemical कैंसर से लड़ने में कारगर सिद्ध होते है।

6. हृदय को स्वस्थ रखता है – रिसर्च में पाया गया है की काजू हृदय को स्वस्थ बनाये रखने में बड़ा ही अहम योगदान देता है।

7. मोटापा –  काजू खाने से आपका वज़न नियंत्रण में रहता है, परन्तु इस बात का भी धयान रखे की जरूरत से जायदा खाने से इसका उल्टा असर पर सकता है और weight gain भी हो सकता है।

8. मधुमेह  – हाल ही में रिसर्च के मुताबिक काजू के लगातार इउपयोग करने से डायबिटीज का खतरा कम होता है और अगर आपको already diabetes है तो उसको बढ़ने से रोकता है।

9. दाँत – काजू दाँतों और मसूड़ो को स्वास्थ रखता है। इसके regular इस्तेमाल से दातों को मजबूती मिलती है। इसमें उपलब्ध chemicals दातों को झड़ने से बचाते है।

10. मर्दाना ताकत –  काजू खाने से धातु पुष्ट और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ने से वीर्य गाढा होता है। जो व्यक्ति इसका नियमित सेवन करता है उसकी सम्भोग शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

Friday, 26 August 2016

मौसम की मार से सर्दी, खाँसी या जुकाम हो जाये तो अपनाएँ ये अचूक रामबाण उपाय




दोस्तों किसी को भी सर्दी ज़ुकाम हो जाना एक आम बात है, वैसे तो यह आम बात है लेकिन अगर सर्दी जुखाम बिगड़ जाए तो बहुत ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ जाता है ना तो आप दोस्तों के बीच उठ बैठ सकते हैं और सर्दी जुखाम की वजह से आपको कुछ भी अच्छा नहीं लगता और कई बार तो सर्दी जुखाम होने की वजह से आप को बुखार भी आ जाता है.

जुकाम का इलाज :

आज आपको सर्दी-जुकाम को घरेलू नुस्खों द्वारा ठीक करने के उपाय बता रहे हैं, वैसे सर्दी-जुकाम संक्रमण से तेजी से फैलता है इसलिए इस बीमारी से बच पाना बहुत मुश्किल है. यहां आपके लिए कुछ सर्दी जुकाम को जल्दी से ठीक करने वाले घरेलू नुस्खे दिए जा रहे हैं. मुझे पूरी उम्मीद है इससे इन घरेलू नुस्खों से आपको सर्दी जुकाम से बहुत जल्द राहत मिल जाएगी और ये पोस्ट अच्छी लगे तो दोस्तों अपने फेसबुक प्रोफाइल पर इस को जरुर शेयर करना ताकि आपके दोस्त भी इस जानकारी को पढ़ लें।
सर्दी जुकाम के कारण अगर सर भारी हो रहा है तो अजवाइन को तवे पर अच्छी तरह गर्म करके एक कपड़े में उसको रखकर पोटली जैसी बना लें अब इस पोटली को आप अपने हाथों पर मलें, और नाक से सूंघें  थोड़ी ही देर में अगर आपकी नाक भी बह रही हो तो वह भी बंद हो जाती है इसको सूंघने से आपका सर दर्द और जो सर में भारीपन बना हुआ है वह भी जल्द ठीक हो जाता है।

➡ सर्दी जुकाम के लिए आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खों :

बहुत तेज सर्दी होने के कारण यदि आप को बुखार आ गया हो या हरारत सी हो तो आप एक चम्मच अजवाइन और इससे लगभग 4 गुना गुड़ एक गिलास पानी में अच्छी तरह से उबाल लें और जब ये थोड़ा गुनगुना रह जाए तब इस काढ़े को पीकर छोड़ कर सो जाएं।

सर्दी और खांसी को ठीक करने का एक देसी घरेलू उपचार बहुत कारगार है. एक अमरुद (जामफल) को लेकर गर्म राख में दबा दें और तकरीबन से 20 या 30 मिनट तक उसमें दबा रहने दें और फिर जब वह भुन जाय तो उसको निकालकर हल्का हल्का गर्म खा लें. इससे तेज से तेज सर्दी और खांसी में भी आराम मिलता है।

अधिक तेज कफ की दिक्कत होने पर आपकी छाती में कफ जमा हो गया है तो इस से राहत पाने के लिए आप सौ ग्राम सरसो के दानों को पीसकर उसमें सौ ग्राम हल्दी हल्की आंच पर अच्छी तरह से भून लें और सुबह शाम एक चम्मच शहद के साथ लें इससे आपकी छाती का सारा बलगम निकल के बाहर हो जाता है।

और ऐसे लोग जिन लोगों को लगातार सर्दी जुकाम बना रहता है या नजला हो उन लोगों को हल्के गुनगुने गर्म पानी से ही नहाना चाहिए।

जुकाम के साथ साथ बुखार भी है तो आप इस उपाय को कर सकते हैं एक चम्मच प्याज के रस में 2 छोटे चम्मच शहद मिलाकर चाटें, और एक बात का विशेष ध्यान रखें के इसको खाने के बाद बाद बाहर हवा में ना जाएं और यदि संभव सो जाएं।

अगर गले में खराश है और आपकी नाक भी सर्दी के कारण बंद है तो इसके लिए आप एक बेहद सस्ता और सटीक आसान उपाय कर सकते हैं एक गिलास गरम पानी में दो चम्मच नमक डालकर गरारे करें, ऐसा करने से आप का गला साफ हो जाएगा और आपको इस बात को जानकर हैरानी होगी कि इस तरह का प्रयोग करने से यह आपको तमाम तरह की बीमारियों से दूर रखने में भी मदद करता है।

तेज़ सर्दी या खांसी और ज़ुकाम में आप गुड और अदरक को अच्छी तरह से गर्म करके चाटने से भी बहुत जल्द आराम मिलता है।

बहुत ज्यादा सर्दी और ज़ुकाम होने पर आप गर्म दूध में आधा छोटा चम्मच पिसी हुई हल्दी को भूनकर दूध के साथ मिलाकर पी जाए यह देसी घरेलू नुस्खा भी बहुत काम का है इसके अलावा आपको इससे खांसी में भी रहत मिलती है।

Tuesday, 23 August 2016

सिर्फ 1 चीकू आपको इन 6 अद्भुत फ़ायदों से ओत प्रोत कर देगा, चीकू खाओ जवाँ हो जाओ


चीकू एक सदाबहार पेड़ होता है जो आज के युग में लगभग पूरीदुनिया में पाया अथवा उगाया जाता है । अलग देशों में अलग अलग प्रजाति के चीकू पाये जाते हैं । भारतवर्ष जैसे विशाल देशों में चीकू की कई सारी प्रजातियाँ पायी जाती हैं । सामान्यत: एक चीकू का वजन 100 से 150 ग्राम तक होता है किंतु इनका आकार प्रजातियों के अनुसार अलग अलग हो सकता है । आकार प्रकार से आगे बात करें तो चीकू का भारतीय फलों में एक विशिष्ट स्थान है और सम्पूर्ण देश में समान रूप से और चाव के साथ खाया जाता है । इन सबके अतिरिक्त चीकू में बहुत से स्वास्थय लाभ भी छिपे हुये हैं जो हम जानेंगे इस पोस्ट में Ayurveda Natural Care के माध्यम से।

1. आँखों को सुधारे :- 

जब चीकू के स्वास्थय लाभों की बाते हो रही हों तो इस से पहले कोई और लाभ ध्यान में आ ही नही सकता । चीकू में बहुत ही उत्तम प्रकार का और प्रचुर मात्रा में विटामिन ए मिलता है । विटामिन ए आँखों के सबसे ज्यादा जरूरी तत्वों में से एक है । चीकू के इस लाभ को पाने के लिये रोज एक या दो चीकू का सेवन किया जाना चाहिये ।



2. हड्डियों को मजबूत करे :- 


चीकू में कैल्शियम, फास्फोरस और ऑयरन तत्व पाये जाते हैं और ये तीनों ही तत्व हड्डियों को मजबूत बनाने के लिये सबसे ज्यादा जरूरी हैं । चीकू में मौजूद इन तीनों तत्वों का लाभ उठाने के लिये यदि बचपन से ही चीकू का नियमित सेवन किया जाये तो बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने की शिकायत नही होगी ।

3. कब्ज से राहत :- 

पूरे चीकू फल में घुलनशील फाईबर मौजूद होता है जो पुरानी से पुरानी कब्ज में भी, नियमित सेवन किये जाने पर लाभ करता है । यदि चीकू के साथ पके पपीते का भी सेवन किया जाये और बाद में बहुत थोड़ा सा गुनगुना पानी पिया जाये तो यह प्रयोग बहुत ही उत्तम लाभ प्रदान करता है।

4. गर्भावस्था में अतयंत लाभकारी :- 

गर्भावस्था के समय जरूरी सभी जरूरी मुख्य तत्व जैसे कि कैल्शियम, ऑयरन, विटामिन बी आदि चीकू में पाये जाते हैं साथ ही इसका विशिष्ट स्वाद गर्भावस्था में होने वाली जी मिचलाने की समस्या का भी समाधान देता है । इस प्रकार ये समझा जा सकता है कि यदि गर्भावस्था में नियमित चीकू का सेवन किया जाये तो यह गर्भवती महिला और होने वाले शिशु दोनो को ही मजबूत बनाता है ।

5. ऊर्जा का स्रोत :- 

चीकू में ग्लुकोज़ के अवयव बहुत ही ज्यादा मात्रा में पाये जाते हैं जिस कारण से चीकू सेवन किये जाने पर तुरंत ही शरीर को ऊर्जा की पूर्ति करता है ।

6. भूख कम करता है :- 

चीकू का एक विशेष गुण होता है कि यह भूख लगना कम करता है । इसका यह असर चार-पाँच चीकू खाने के बाद आता है । ऐसी अवस्था में यह उन लोगों के लिये विशेष लाभकारी हो सकता है जो ज्यादा भूख लगने की वजह से ज्यादा खाते रहते हैं और इस कारण से उनका वजन बढ़ने लगता है । यदि वो भूख लगने पर 4-5चीकू का सेवन करें तो शरीर में लम्बे समय तक ऊर्जा बनी रहेगी और भूख भी नही लगेगी।

विशेष नोट :- चीकू में ग्लुकोज़ बहुत ही प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिस कारण से यह मधुमेह के रोगियों में शुगर के लेवल को बढ़ा सकता है । अतः मधुमेह के रोगियों को सलाह है कि वो चीकू का सेवन अपने चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही करे ।